आयुर्वेद

काजू खाने के फायदे

काजू को ड्रायफ्रूट्स का राजा माना जाता है। स्वाद और सेहत बनाने मे वाकई काजू का कोई जोड़ नहीं है। काजू यदि रोज खाया जाए तो इसके अनेक फायदे हैं। थोड़े से काजू खाने से न सिर्फ शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि कई बीमारियां भी दूर होती है। आज हम बताने जा रहे हैं काजू खाने से होने वाले कुछ ऐसे ही फायदों के बारे में।
थकान दूर करता है
काजू को ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसका कोई कुप्रभाव नहीं होता। ये अलग बात है कि इसे कम मात्रा में खाना चाहिए। कई बार आप बिना किसी परिश्रम के थकान महसूस करते हैं। आपका मूड भी अपसेट हो रहा होता है, ऐसे में  दो-तीन काजू चबा लें। इससे थकान तत्काल दूर हो जाएगी।
सेहतमंद व खूबसूरत बनाता है
काजू में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसलिए इसे खाने से बाल और त्वचा स्वस्थ और सुंदर हो जाती है।
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में लाजवाब-
काजू कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखता है। इसमें प्रोटीन अधिक होता है। यह जल्दी पच जाता है। गुर्दे को ताकत देता है। काजू में आयरन अधिक होता है।

इसीलिए जिन लोगों को खून की कमी हो, उन्हें इसका नियमित सेवन करना चाहिए। काजू पाचन शक्ति बढ़ाता है। इससे भूख ज्यादा लगती है। आंतों में भरी गैस बाहर निकलती है।

स्किन के लिए है वरदान-
काजू को पानी में भिगोकर पीसकर इसका उपयोग मसाज के लिए करने पर रंगत निखरने लगती है। काजू तैलीय, शुष्क आदि हर प्रकार की त्वचा के लिए लाभप्रद होता है।

यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो आप काजू को रातभर दूध में भिगो दें। सुबह महीन पीसकर उसमें मुल्तानी मिट्टी, नींबू या दही की थोड़ी मात्रा मिलाकर चेहरे पर लगाएं। त्वचा धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी।

दिमाग को धारदार बनाता है-
काजू में एक प्रकार का तेल होता है, जो विटामिन-बी का खजाना है। इसी वजह से इसे तत्काल शक्तिदायक खाद्य पदार्थ माना गया है। वैसे, बादाम में भी विटामिन-बी और फोलिक एसिड होता है।

भूखे पेट काजू खाकर शहद खाने से स्मरण शक्ति जल्दी बढ़ती है। काजू खाने से यूरिक अम्ल नहीं बनता। काजू का तेल सफेद दागों पर लगाने से धीरे-धीरे सफेद दाग मिट जाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

हड्डियों को मजबूत बनाता है- 
काजू में प्रोटीन अधिक होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता  है। काजू मसूड़ों और दांतों को स्वस्थ रखता है। आपको बता दें कि काजू में मोनो सैचुरेटड फैट होता है, जो दिल को स्वस्थ रखता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।

काजू में एंटी ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं। काजू शरीर का वजन भी संतुलित रखता है।

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लहसुन के लाभ

-प्रतिदिन लहसुन की एक कली के सेवन से शरीर को विटामिन ए, बी और सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं।

– लहसुन में एंटी बैक्टिरियल तत्व पाए जाते हैं। इसीलिए पिंपल्स की समस्या हो तो इसका सेवन सेहत पर बेहतर असर दिखाता है। पिंपल पर लहसुन की स्लाइस लेकर हल्के से रब करने पर पिंपल बहुत जल्दी बैठ जाता है।

– लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और  इस पेस्ट में  10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे।

– लहसुन का सेवन बच्चों के लिए भी फायदेमंद होता है। यह मौसमी बीमारियों में तो फायदेमंद होता ही है। साथ ही पांच साल तक के बच्चों में होने वाले प्रॉयमरी कॉम्प्लेक्स में यह बहुत लाभदायक होता है।

– लहसुन के नियमित सेवन सेस्किन इंफेक्शन भी समाप्त हो जाते है जैसे – रिंगवॉर्म या एथलीट फुट आदि।

– लहसुन दिल को ऑक्सीजन रेडीकल्स के प्रभाव से बचाता है ताकि हार्ट को कोई नुकसान न पहुंचे। इसके सल्फर युक्त यौगिक हमारी खून की वाहिकाओं को अवरूद्ध होने से बचाते हैं। जिसकी वजह से एथ्रेरोस्लेरोसिस की दिक्कत खत्म हो जाती है। लहसुन की एंटी – क्लॉटिंग प्रॉपर्टी, रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के जमनेसे रोकती है।

-सरसों के तेल में लहसुन की कलियां  उबाल लें। इस तेल को कान में डालने से कान दर्द की समस्या खत्म हो जाती है।

– लहसुन में एंटी – इंफ्लैमेटरी प्रॉपर्टी होती हैं। जिनकी मदद से एलर्जी को दूर भगाया जा सकता है। लहसुन की एंटी – आर्थी टिक प्रॉपर्टी की सहायता से डायली सल्फाइड और थियासेरेमोनोने भी मेंटेन रहते है। इसमें एलर्जी से लड़ने वाले कई तत्व होते हैं। लहसुन के जूस से चकत्ते पड़ने की समस्या भी दूर हो जाती है।

– लहसुन का तेल हथेली व पैरों के तलवों पर लगाने से मच्छर पास नहीं आते व स्किन सॉफ्ट हो जाती है।

– लहसुन को दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लहसुन की कलियों को आग में भून कर खिलाने से सांस चलने की तकलीफ पर काफी काबू पाया जा सकता है। जिन बच्चों को सर्दी ज्यादा होती है उन्हें लहसुन की कली की माला बनाकर पहनाना चाहिए।

– लहसुन के सेवन से हमेशा कामोत्तेजना बनी रहती है, क्योंकि यह बॉडी में अच्छी तरह से परिसंचरण को बढ़ाता है।

– लहसुन एक नेचुरल पेस्टीसाइड का भी काम करता है। लहसुन, मिनरल ऑइल, पानी और लिक्विड साबुन को मिलाकर एक नेचुरल कीटनाशक बनाया जा सकता है।

– नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित रहता है। एसिडिटी और गैस्टिक ट्रबल में भी इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करता है।

– लहसुन गम का भी काम करता है। लहसुन को क्रश करके उसका रस यदि किसी ग्लास के हेयर लाइन क्रेक पर लगाया जाए तो क्रेक भर जाता है।

– लहसुन में डायली – सल्फाइड होता है जो फेरोपोरटिन की मात्रा को बढ़ा देता है और आयरन मेटाबोलिज्म में सुधार कर देता है।

– लहसुन में एंटी – कैंसर प्रॉपर्टी पाई जाती है। इसलिए लहसुन का नियमित सेवन करने से कैंसर होने का खतरा बहुत कम रहता है।

– बैक्टीरियल तत्व, गले में होने वाले संक्रमण को भी दूर भगाता है। श्वास संबंधी कई समस्याएं जैसे – अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ आदि में लहसुन रामबाण दवा है। इसके सेवन से कई गंभीर समस्याओं का समाधान भी हो जाता है।

– जिनके शरीर में रक्त की कमी है, उन्हें लहसुन का सेवन अवश्य करना चाहिए, इसमें पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व होतेहैं। जो कि रक्त निर्माण में सहायक होते हैं। लहसुन में विटामिन सी होने से यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है।

– लहसुन के नियमित सेवन से सांस की समस्या में आराम मिलता है, इससे सर्दी – जुकाम में राहत मिलती है।

– यदि आप लहसुन का नियमित रूप से सेवन करते हैं तो आप ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं से बड़ी ही आसानी से निजात पा सकते हैं।

– लहसुन के सेवन से वजन को घटाया जा सकता है, क्योंकि इसमें हमारे शरीर में बनने वाली वसा कोशिकाओं को विनियमित करने की क्षमता है, जिससे वजन आसानी से घट जाता है।

– अपने रोजाना के खाने में लहसुन शामिल कर लेने से इम्यून पॉवर बढ़ता है। अगर मौसमी सर्दी या खांसी हो जाए तो लहसुन की चाय बनाकर लेने से राहत मिलती है।

– गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए।

– कोलेस्ट्रॉल पेशेन्ट्स के लिए लहसुन फायदेमंद होता है। यह खून को पतला करने में सहायक होता है और शरीर में खून के थक्के बनने से रोकता है। इससे चोट लगने के बाद, खून बहने का डर भी नहीं रहता है।

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