Monthly Archives: July 2014

चोरी की सजा

जेन मास्टर बनकेइ ने एक ध्यान शिविर लगाया, तो कई बच्चे उनसे सीखने आये। पहले दिन उन्होंने ध्यान के कुछ सूत्र बताए और यह भी कि अपने आचरण के साथ पड़ोसी के बारे में क्या-क्या ध्यान देना है। शिविर के दौरान किसी दिन एक छात्र को चोरी करते हुए पकड़ लिया गया।

बनकेइ को यह बात बताई गई, बाकी साधकों ने अनुरोध किया की चोरी की सजा के रूप में इस छात्र को शिविर से निकाल देना चाहिए। पर बनकेइ ने इस अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया और सबके साथ उस बच्चे को भी पढ़ाते-सिखाते रहे।

लेकिन कुछ दिन बाद फिर वैसी ही चोरी की घटना हुई। वही छात्र दुबारा चोरी करते हुए पकड़ा गया। उसे फिर बनकेइ के सामने ले जाया गया। इस बार तो साधकों को पूरी उम्मीद थी कि उसे शिविर से निकाल दिया जाएगा। पर इस बार भी उन्होंने छात्र को कोई सजा नहीं दी।

इस वजह से दूसरे बच्चे रुष्ट हो उठे और उन्होंने मिलकर बनकेइ को पत्र लिखा कि यदि उस छात्र को नहीं निकाला जाएगा, तो हम सब शिविर छोड़ कर चले जाएंगे। बनकेइ ने पत्र पढ़ा और सभी साधकों को तुरंत इकट्ठा होने के लिए कहा।

उनके इकट्ठा होने पर बनकेइ ने बोलना शुरू किया, ‘आप सभी बुद्धिमान हैं। आप जानते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। यदि आप कहीं और पढ़ने जाना चाहते हैं, तो जा सकते हैं। पर यह बेचारा यह भी नहीं जानता कि क्या सही है और क्या गलत। यदि इसे मैं नहीं पढ़ाऊंगा तो इसे कौन और पढ़ाएगा?

आप सभी चले भी जाएं, तो भी मैं इसे यहां पढ़ाऊंगा।’ यह सुनकर चोरी करने वाला छात्र फूट-फूटकर रोने लगा। अब उसके अंदर से चोरी करने की इच्छा हमेशा के लिए जा चुकी थी। दूसरे छात्र उसे रोता देख कर उसे चुप कराने लगे।

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तीन छन्नियों का परीक्षण

प्राचीन यूनान में सुकरात अपने ज्ञान और विद्वता के लिए बहुत प्रसिद्ध था। एक दिन एक परिचित व्यक्ति उसके पास आकर कहने लगा, मैंने आपके एक मित्र के बारे में कुछ सुना है, और वह आपको बताना चाहता हूं।

सुकरात ने कहा, दो पल रुको। तुम कुछ बताओ, इससे पहले मैं चाहता हूं कि हम एक छोटा-सा परीक्षण कर लें। परिचित ने हामी भर दी। सुकरात ने आगे बताया, इसे मैं तीन छन्नियों का परीक्षण कहता हूं। पहली बात तो यह बताओ कि क्या तुम यह सौ फीसदी दावे से कह सकते हो कि जो बात तुम मुझे बताने जा रहे हो, वह पूरी तरह सच है?

नहीं, परिचित ने कहा, दरअसल मैंने सुना है कि…सुकरात ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, इसका अर्थ है कि तुम जो कहने जा रहे हो, उसके बारे में पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो कि वह पूरी तरह सत्य है। चलो, अब दूसरी छन्नी का प्रयोग करते हैं। इसे मैं अच्छाई की छन्नी कहता हूं। यह बताओ कि तुम जो बताने जा रहे हो, क्या वह कोई अच्छी बात है?

नहीं, बल्कि वह तो…परिचित अपनी बात पूरी करता कि सुकरात ने उसे टोकते हुए कहा, अर्थात तुम जो कुछ कहने वाले थे, उसमें कोई भलाई की बात नहीं है। यह भी पता नहीं कि वह सच है या झूठ। चलो, छन्नी का एक परीक्षण अभी बचा हुआ है, और वह है, उपयोगिता की छन्नी। यह बताओ कि जो बात तुम बताने वाले हो, क्या वह किसी काम की है?

परिचित ने कहा, नहीं, ऐसा तो नहीं है। सुकरात ने इसके बाद कहा, बस हो गया। जो बात तुम बतानेवाले थे, वह न तो सत्य है, न ही भली, और न ही मेरे काम की। उसे जानने में कीमती समय नष्ट करने की जरूरत मैं नहीं समझता। इसीलिए मुझे मत बताओ।

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काजू खाने के फायदे

काजू को ड्रायफ्रूट्स का राजा माना जाता है। स्वाद और सेहत बनाने मे वाकई काजू का कोई जोड़ नहीं है। काजू यदि रोज खाया जाए तो इसके अनेक फायदे हैं। थोड़े से काजू खाने से न सिर्फ शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि कई बीमारियां भी दूर होती है। आज हम बताने जा रहे हैं काजू खाने से होने वाले कुछ ऐसे ही फायदों के बारे में।
थकान दूर करता है
काजू को ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इसका कोई कुप्रभाव नहीं होता। ये अलग बात है कि इसे कम मात्रा में खाना चाहिए। कई बार आप बिना किसी परिश्रम के थकान महसूस करते हैं। आपका मूड भी अपसेट हो रहा होता है, ऐसे में  दो-तीन काजू चबा लें। इससे थकान तत्काल दूर हो जाएगी।
सेहतमंद व खूबसूरत बनाता है
काजू में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसलिए इसे खाने से बाल और त्वचा स्वस्थ और सुंदर हो जाती है।
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में लाजवाब-
काजू कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखता है। इसमें प्रोटीन अधिक होता है। यह जल्दी पच जाता है। गुर्दे को ताकत देता है। काजू में आयरन अधिक होता है।

इसीलिए जिन लोगों को खून की कमी हो, उन्हें इसका नियमित सेवन करना चाहिए। काजू पाचन शक्ति बढ़ाता है। इससे भूख ज्यादा लगती है। आंतों में भरी गैस बाहर निकलती है।

स्किन के लिए है वरदान-
काजू को पानी में भिगोकर पीसकर इसका उपयोग मसाज के लिए करने पर रंगत निखरने लगती है। काजू तैलीय, शुष्क आदि हर प्रकार की त्वचा के लिए लाभप्रद होता है।

यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो आप काजू को रातभर दूध में भिगो दें। सुबह महीन पीसकर उसमें मुल्तानी मिट्टी, नींबू या दही की थोड़ी मात्रा मिलाकर चेहरे पर लगाएं। त्वचा धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी।

दिमाग को धारदार बनाता है-
काजू में एक प्रकार का तेल होता है, जो विटामिन-बी का खजाना है। इसी वजह से इसे तत्काल शक्तिदायक खाद्य पदार्थ माना गया है। वैसे, बादाम में भी विटामिन-बी और फोलिक एसिड होता है।

भूखे पेट काजू खाकर शहद खाने से स्मरण शक्ति जल्दी बढ़ती है। काजू खाने से यूरिक अम्ल नहीं बनता। काजू का तेल सफेद दागों पर लगाने से धीरे-धीरे सफेद दाग मिट जाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

हड्डियों को मजबूत बनाता है- 
काजू में प्रोटीन अधिक होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता  है। काजू मसूड़ों और दांतों को स्वस्थ रखता है। आपको बता दें कि काजू में मोनो सैचुरेटड फैट होता है, जो दिल को स्वस्थ रखता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।

काजू में एंटी ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं। काजू शरीर का वजन भी संतुलित रखता है।

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Daughters are Angels

On the first day of their marriage, wife and husband agreed not to open the door for ANY visitor..

That same day, the husband’s parents came to see them, and knocked on the door..

Husband and the wife looked at each other.. the husband wanted to open the door, but since they had an agreement, he did not, so his parents left..

After a while, the same day, the wife’s parents came visiting..

Wife and husband looked at each other, and even though they had an agreement, the wife with tears on her eyes whispered:- “I can’t do this to my parents”, and she opened the door..

Husband did not say anything..

Years passed and they had 2 boys..

Afterwards, they had a third child which was a girl..

The father planned a very big and lavish party for the new born baby girl and he invited everyone over..

Later that night, his wife asked him what was the reason for such a big celebration for this baby, while we did not do so for the brothers..

The Husband simply replied:- “because she is the one who will open the door for me..”

Daughters are so special..
Your little girl will hold your hand for only a little while.. but will hold your heart for a life time..

Daughters are angels..

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ईश्वर कहाँ रहता है?

एक दिन अकबर ने बीरबल के सामने सहसा 3 प्रश्न उछाल दिए…….

प्रश्न थे- ‘ईश्वर कहाँ रहता है?’
‘वह कैसे मिलता है’
और वह करता क्या है?”

बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले- ”जहाँपनाह! इन
प्रश्नों के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।”

जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे। उनके पुत्र ने जब उनसे
पूछा तो उन्होंने बताया-
”बेटा! आज अकबर बादशाह ने मुझसे एक साथ तीन प्रश्न ‘ईश्वर
कहाँ रहता है? वह कैसे मिलता है? और वह करता क्या है?’ पूछे हैं। मुझे उनके
उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है।”

बीरबल के पुत्र ने कहा- ”पिता जी! कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले
चलना मैं बादशाह के प्रश्नों के उत्तर दूँगा।”
पुत्र की हठ के कारण बीरबल अगले दिन अपने पुत्र को साथ लेकर दरबार में
पहुँचे।
बीरबल को देख कर बादशाह अकबर ने कहा- ”बीरबल मेरे प्रश्नों के उत्तर
दो। बीरबल ने कहा ”जहाँपनाह आपके प्रश्नों के उत्तर तो मेरा पुत्र भी दे
सकता है।”

अकबर ने बीरबल के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा- ”बताओ! ‘ईश्वर
कहाँ रहता है?” बीरबल के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध
बादशाह से मँगवाया और कहा- जहाँपनाह दूध कैसा है? अकबर ने दूध
चखा और कहा कि ये मीठा है। परन्तु बादशाह सलामत क्या आपको इसमें
शक्कर दिखाई दे रही है? बादशाह बोले नही। वह तो घुल गयी।

जी हाँ, जहाँपनाह! ईश्वर भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है।
जैसे शक्कर दूध में घुल गयी है परन्तु वह दिखाई नही दे रही है।

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब दूसरे प्रश्न का उत्तर पूछा- ”बताओ! ईश्वर
मिलता केसे है?” बालक ने कहा- ”जहाँपनाह थोड़ा दही मँगवाइए।”
बादशाह ने दही मँगवाया तो बीरबल के पुत्र ने कहा- ”जहाँपनाह!
क्या आपको इसमं मक्खन दिखाई दे रहा है। बादशाह ने कहा- ”मक्खन
तो दही में है पर इसको मथने पर ही दिखाई देगा।”
बालक ने कहा- ”जहाँपनाह! मन्थन करने पर ही ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं।”

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब अन्तिम प्रश्न का उत्तर पूछा- ”बताओ!
ईश्वर करता क्या है?”

बीरबल के पुत्र ने कहा- ”महाराज! इसके लिए आपको मुझे अपना गुरू
स्वीकार करना पड़ेगा।” अकबर बोले- ”ठीक है, तुम गुरू
और मैं तुम्हारा शिष्य।”

अब बालक ने कहा- ”जहाँपनाह गुरू तो ऊँचे आसन पर बैठता है और शिष्य
नीचे।” अकबर ने बालक के लिए सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे
बैठ गये।

अब बालक ने सिंहासन पर बैठ कर कहा- ”महाराज! आपके अन्तिम प्रश्न
का उत्तर तो यही है।”अकबर बोले- ”क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।”
बालक ने कहा- ”जहाँपनाह! ईश्वर यही तो करता है। “पल भर में
राजा को रंक बना देता है और सेवक को सम्राट बना देता है।”

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